लौरिया अरेराज अशोक स्तंभ: पत्थर पर अंकित सम्राट अशोक का संदेश

पूर्वी चम्पारण के अरेराज के निकट लौरिया में स्थित अशोक स्तंभ इस क्षेत्र की प्राचीन ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रमाण है। महात्मा गांधी के सत्याग्रह से बहुत पहले चम्पारण मौर्यकालीन प्रशासन और बौद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ था। इस स्तंभ पर अंकित अभिलेख उस विरासत को आज भी सामने लाते हैं।
सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में अनेक स्थानों पर पत्थरों और स्तंभों पर संदेश अंकित करवाए। इन संदेशों में नैतिक आचरण, प्रजा के कल्याण, धार्मिक सहिष्णुता और शासन की जिम्मेदारी जैसे विषयों पर बल मिलता है। उस समय ये अभिलेख जनता तक शासक के विचार पहुँचाने के स्थायी माध्यम थे।
लौरिया अरेराज का स्तंभ एक ही पत्थर से निर्मित है। इसकी ऊँचाई लगभग 36 फीट बताई जाती है। स्तंभ पर अशोक के प्रमुख स्तंभलेख अंकित हैं। आज इसके शीर्ष पर कोई पशु आकृति नहीं है। समय, मौसम और मानवीय गतिविधियों से ऐसे प्राचीन स्मारकों के संरक्षण की चुनौती बढ़ती है।
यह स्थान भारतीय पुरातत्व, अभिलेख अध्ययन और प्राचीन संचार परंपरा में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखता है। अरेराज के सोमेश्वरनाथ मंदिर के दर्शन करने वाले यात्री भी यहाँ आ सकते हैं। मंदिर की धार्मिक विरासत और अशोक स्तंभ का इतिहास, दोनों मिलकर इस क्षेत्र की विविध सांस्कृतिक पहचान सामने रखते हैं।
यह स्थल अरेराज से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित है। मोतिहारी से सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है। अभिलेखों को छूने या स्मारक की सतह को नुकसान पहुँचाने से बचना चाहिए।
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